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    16.03.2026 : The Governor of Sikkim, Shri Om Prakash Mathur inaugurated the two day long national seminar on “Cultural Heritage and Literature of Northeast India”.

    Publish Date : March 17, 2026

    The Governor of Sikkim, Shri Om Prakash Mathur inaugurated the two day long national seminar on “Cultural Heritage and Literature of Northeast India”. A two-day seminar is jointly organized by the Lok Bhavan Sikkim, Central Hindi Directorate, Ministry of Education, Govt of India and the Department of Hindi, Sikkim Central University.

    In his inaugural address, the Governor congratulated the Central Hindi Directorate, Ministry of Education and Sikkim Central University for organizing such programme.
    The Governor said “Such seminar will play a vital role in to understand the unique and diverse cultures northeast India and it inspire the younger generation to actively participate in preserving and carrying forward our rich traditions for the future.”

    The Governor urged the academicians and scholars to bridge the gap between academic research and societal needs to foster an equitable, inclusive, and plural society. He called upon for making India Vishwa Guru and the hub of innovation and knowledge once again. He further mentioned that there was a time when India was known as the Vishwa Guru adding that steps must be taken to bring back that past glory of Vishwa Guru.

    He stressed on student exchange programme which offer valuable opportunities to them for intercultural learning. He added that the students exchange initiative connects children from eight Northeastern states with the rest of the country, helping them to experience the languages, culture, traditions, and way of life while deepening a sense of unity in diversity.

    The two day seminar mainly focused on the diverse cultures, literature, languages and traditions of Northeast India and discussions will cover literature, folk narratives, language revitalization, and the preservation of culture and traditions. During the event, scholars and academician will present their research papers.

    The program was attended by Prof. H K Mishra, Director of the Central Hindi Directorate, Prof. Shantanu Kumar Swain, Vice-Chancellor of Sikkim Central University, academician, scholars and literary figures.

    Earlier Prof. H K Mishra, Director of the Central Hindi Directorate and Prof. Santanu Kumar, Vice-Chancellor of Sikkim Central University outlined the aim and objectives of two day event.

    पूर्वोत्तर भारत का सांस्कृतिक वैभव और साहित्य विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन

    सिक्किम के माननीय राज्यपाल श्री ओम प्रकाश माथुर ने शिक्षा, संस्कृति संरक्षण, सामाजिक दायित्व पर विशेष जोर दिया

    लोकभवन सिक्किम, केंद्रीय हिंदी निदेशालय (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) तथा हिंदी विभाग, सिक्किम विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आज “पूर्वोत्तर भारत का सांस्कृतिक वैभव और साहित्य” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ आज लोकभवन सिक्किम में हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन सिक्किम के माननीय राज्यपाल श्री ओम प्रकाश माथुर ने किया।
    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित माननीय राज्यपाल महोदय ने अपने उद्बोधन में आयोजकों – केंद्रीय हिंदी निदेशालय तथा सिक्किम विश्वविद्यालय को इस महत्वपूर्ण प्रयास के लिए हार्दिक बधाई देते हुए इस आयोजन को पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और युवा पीढ़ी में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम बताया है ।
    राज्यपाल महोदय ने विद्वानों, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों से अपील की कि जीवन के कुछ क्षण समाज को अवश्य दें। उन्होंने विशेष रूप से इस वर्ग पर जोर देते हुए कहा कि बुद्धिजीवियों का दायित्व है कि वे अपने व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर समाज सेवा में योगदान दें, लोगों के बीच में जाएं, संवाद स्थापित करें और अपने जीवन के कुछ क्षण को समाज में दें ,यही जीवन की सार्थकता है।
    माननीय राज्यपाल ने भारत की प्राचीन विश्व गुरु परंपरा को जीवंत करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि हमें अपनी इस गौरवशाली विरासत को पुनः स्थापित करना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों के बीच राज्य-स्तरीय आदान-प्रदान की वकालत की और कहा कि “विद्यार्थियों का एक राज्य से दूसरे राज्य में आदान-प्रदान होना चाहिए, ताकि वे एक-दूसरे की संस्कृति, परंपरा, भाषा और जीवनशैली से परिचित हो सकें। इससे राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समझ मजबूत होगी।
    राज्यपाल ने प्राचीन भारतीय शिक्षा संस्थाओं जैसे नालंदा और तक्षशिला का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें इनकी ओर मुड़ना चाहिए और आत्म-चिंतन करना चाहिए। उन्होंने हाल के वर्षों में भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हाल के वर्षों में संस्कृति का पुनर्जागरण हुआ है, हमें इसे और मजबूत बनाना हम सबकी समूहिक दायित्व है।

    कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान, दीप प्रज्ज्वलन, स्वागत वक्तव्य तथा विभिन्न संबोधनों से हुई। स्वागत वक्तव्य, हिन्दी विभागाध्यक्ष, प्रो. प्रदीप के शर्मा द्वारा दिया गया वहीं विषय प्रवर्तन प्रो. प्रदीप त्रिपाठी,सहायक प्रोफेसर ,हिन्दी विभाग द्वारा दिया गया। केंद्रीय हिंदी निदेशालय के निदेशक प्रो. हितेंद्र कुमार मिश्र ने संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। सिक्किम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.शांतनु कुमार स्वाईं ने भी संबोधन दिया। माननीय राज्यपाल महोदय का अभिनंदन विशेष रूप से किया गया, जिसमें केंद्रीय हिंदी निदेशालय एवंसिक्किम विश्वविद्यालय द्वारा प्रतीक चिन्ह भेट की गई |
    इस दौरान देश भर से विशेष रूप से पूर्वोत्तर से पधारे विद्वानों का राज्यपाल महोदय ने सम्मान किया| कार्यक्रम में केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा माननीय राज्यपाल को पुस्तकें भेंट की गईं साथ ही दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया।कार्यक्रम मे केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाई गई जिसे माननीय राज्यपाल ने अवलोकन किया |
    यह संगोष्ठी पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध जनजातीय संस्कृतियों, साहित्य, भाषाओं और परंपराओं पर केंद्रित है, जो विविधता में एकता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है। दो दिवसीय आयोजन में विद्वानों द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे और सांस्कृतिक चर्चाएं होंगी।
    कार्यक्रम में सिक्किम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.शांतनु कुमार स्वाईं तथा केंद्रीय हिंदी निदेशालय के निदेशक प्रो. हितेंद्र कुमार मिश्र, निदेशक भाषा विभाग,श्री ए. डी. छेत्री और अधीनस्थ सभी भाषाओं के प्रतिनिधि तथा अन्य गणमान्य विद्वान उपस्थित रहे।
    इस परिसंवाद की विशेषता है कि इसमें पूर्वोत्तर भारत के आठों राज्य सहित पूरे भारतीय स्तर पर विद्वान एकत्र हुए हैं और साथ ही सिक्किम की सभी स्थानीय भाषा के प्रतिनिधि भी सम्मिलित हुए।