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    22.09.2026 : सिक्किम मारवाड़ी समाज के 135वें स्थापना दिवस समारोह में माननीय राज्यपाल श्री ओम प्रकाश माथुर सम्मिलित

    Publish Date : September 22, 2026

    सिक्किम मारवाड़ी समाज के 135वें स्थापना दिवस समारोह में माननीय राज्यपाल श्री ओम प्रकाश माथुर सम्मिलित:

    सिक्किम के माननीय राज्यपाल श्री ओम प्रकाश माथुर आज गंगटोक में सिक्किम मारवाड़ी समाज के 135वें स्थापना दिवस के
    समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्रीमान प्रेम सिंह जी तामांग की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर माननीय कैबिनेट मंत्री, विधायकगण, जन प्रतिनिधिगण, ऑल इंडिया मारवाड़ी फेडरेशन के पदाधिकारी,सिक्किम मारवाड़ी समाज के अध्यक्ष श्री सज्जन अग्रवाल सहित
    राज्य के कोने-कोने से आए प्रबुद्ध जन और जन समुदाय उपस्थित रहा।

    समारोह के दौरान ऑल इंडिया मारवाड़ी फेडरेशन द्वारा माननीय राज्यपाल का अभिनंदन किया गया, साथ ही सिक्किम मारवाड़ी समाज द्वारा पारंपरिक रूप से ‘साफ़ा’ पहनाकर आदर-सत्कार किया गया।

    उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राज्यपाल महोदय ने अपने संबोधन की शुरुआत मारवाड़ी समुदाय की उद्यमशीलता और साहस को रेखांकित करने वाली प्रसिद्ध कहावत, “जहां न पहुंचे बैलगाड़ी, वहाँ पहुचें मारवाड़ी” से की।

    कार्यक्रम आयोजन पर हर्ष व्यक्त करते हुए राज्यपाल महोदय ने सिक्किम के आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में मारवाड़ी समाज के 135 वर्षों के अभूतपूर्व योगदान की सराहना की और कहा कि मारवाड़ी समाज ने पिछली एक शताब्दी से अधिक समय में सिक्किम में अपनी कड़ी मेहनत और समृद्ध विरासत से एक विशिष्ट पहचान हासिल की है। उन्होंने उल्लेख किया कि मारवाड़ी समाज सिक्किम में सौहार्दपूर्ण रूप से एक-दूसरे की संस्कृतियों में घुला-मिला हुआ है और स्थानीय समुदाय के साथ कंधे से कंधा मिलाकर विकसित सिक्किम का एक अभिन्न अंग बन चुका है।

    सामूहिक प्रगति के लिए एकता के भाव को आवश्यक बताते हुए राज्यपाल महोदय ने समुदाय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राजस्थान की भूमि मूलतः संघर्ष की भूमि है, यही कारण है कि मारवाड़ी समाज के लोग स्वभाव से ही अत्यंत संघर्षशील और मेहनती होते हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि किस तरह शुरुआती दौर में मारवाड़ी पूर्वजों ने कठिन चुनौतियों और विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए सुदूर क्षेत्रों में वहां के जनजीवन के साथ सामंजस्य बिठाया और राज्य के विकास में अपना अमूल्य योगदान दिया।
    भविष्य की राह दिखाते हुए राज्यपाल महोदय ने मारवाड़ी समाज से अपने सामाजिक जीवन का विस्तार करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रेरित करते हुए कहा कि समुदाय को केवल व्यापार और लेन-देन तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सामाजिक जीवन और जनकल्याण के कार्यों में भी अपना सक्रिय योगदान बढ़ाना आवश्यक है।
    माननीय राज्यपाल ने युवाओं और व्यवसायियों से नए अवसरों को खोजने और नवाचार करने की अपील की, ताकि जब देश ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य प्राप्त करे, तो उसमें सिक्किम के मारवाड़ी समाज का योगदान स्पष्ट रूप से नजर आए।

    इस स्थापना दिवस समारोह में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया , जिसमें राजस्थान की विविध और समृद्ध सांस्कृतिक झलक देखने को मिली।