07.08.2026 : राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राज्यपाल श्री ओम प्रकाश माथुर ने ‘तेन्दोंग ल्हो रुम फात’ की पूर्व संध्या पर आयोजित समारोह में लिया भाग
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राज्यपाल श्री ओम प्रकाश माथुर ने ‘तेन्दोंग ल्हो रुम फात’ की पूर्व संध्या पर आयोजित समारोह में लिया भाग; ऐतिहासिक स्वदेशी आंदोलन की विरासत को आगे बढ़ाने और ‘वोकल फॉर लोकल’ को प्रोत्साहित करने का आह्वान
सिक्किम के माननीय राज्यपाल श्री ओम प्रकाश माथुर ने आज गंगटोक के रिज पार्क परिसर में ‘तेन्दोंग ल्हो रुम फात’ की पूर्व संध्या के अवसर पर लेप्चा समुदाय द्वारा आयोजित एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लिया। यह समारोह ‘यंगथोम’ का तीसरा संस्करण है, जिसमें लेप्चा समुदाय की संस्कृति, रचनात्मकता और उद्यमशीलता को प्रदर्शित करने वाले एक पारंपरिक ओपन मार्केट (खुले बाजार) का आयोजन किया गया है ।
कार्यक्रम ने 7 अगस्त 1905 को प्रारंभ हुए ऐतिहासिक स्वदेशी आंदोलन की भावना को भी स्मरण किया, जिसने भारतीयों में स्वदेशी वस्तुओं के प्रति गौरव, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान की भावना को सुदृढ़ किया था। इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री श्री प्रेम सिंह तामांग की गरिमामय उपस्थिती सहित तेन्दोंग ल्हो रुम फात’ कमेटी के चेयरमैन एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री जी टी ढूंगेल जी, कृषि मंत्री -श्री पूरन गुरुंग जी, कमेटी के अध्यक्ष एवं गंगटोक क्षेत्र विधायक श्री डिले नामग्याल बरफूंगपा , लेप्चा समुदाय से जुड़े जन प्रतिनिधिगण एवं अधिकारीगण और भरी संख्या में जनसमुदाय की उपस्थिती रही |
इस दौरान लेप्चा समुदाय द्वारा भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें सोफिया बैंड के साथ-साथ लेप्चा जनजाति की जीवंत संस्कृति की अद्भुत झलकियां देखने को मिलीं।
इस दौरान माननीय राज्यपाल ने लेप्चा समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला, हस्तशिल्प, बांस-बेंत की कलाकृतियों और पारंपरिक वस्त्रों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने वहां स्थानीय उत्पादों की खरीदारी भी की। इसके साथ ही, राज्यपाल महोदय ने कारीगरों और समुदाय के सदस्यों से बातचीत कर उनके हुनर की सराहना की।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि सिक्किम की उस जीवंत विरासत का प्रतिबिंब है, जिसमें प्रकृति, परंपरा, कला और संस्कृति का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि लेप्चा समुदाय ने पीढ़ियों से अपनी विशिष्ट परंपराओं, हस्तशिल्प और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन पद्धति को संरक्षित रखा है, जो आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
राज्यपाल महोदय ने इस अवसर पर सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे “स्थानीय खरीदें, स्थानीय को प्रोत्साहित करें और सिक्किम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया तक पहुँचाने में सहभागी बनें।