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    03.11.2026 : माननीय राज्यपाल श्री दुष्यन्त गौतम ने हस्तशिल्प एवं हथकरघा निदेशालय का किया दौरा; स्थानीय कला को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने पर दिया बल

    Publish Date : November 3, 2026

    माननीय राज्यपाल श्री दुष्यन्त गौतम ने हस्तशिल्प एवं हथकरघा निदेशालय का किया दौरा; स्थानीय कला को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने पर दिया बल

    सिक्किम के माननीय राज्यपाल श्री दुष्यन्त गौतम ने आज गंगटोक स्थित हस्तशिल्प एवं हथकरघा निदेशालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने राज्य की समृद्ध पारंपरिक कलाओं और शिल्पों का बारीकी से अवलोकन किया। दौरे के दौरान उद्योग विभाग की सचिव सुश्री कर्मा डोमा युत्सो और निदेशालय के निदेशक श्री टी. टी. भूटिया ने माननीय राज्यपाल का स्वागत किया और प्रत्येक अनुभाग की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

    माननीय राज्यपाल ने निदेशालय के विभिन्न प्रशिक्षण एवं उत्पादन अनुभागों का भ्रमण किया, जिनमें विशेष रूप से कालीन बुनाई अनुभाग जहां कारीगरों द्वारा सिक्किमी संस्कृति को दर्शाने वाले डिज़ाइनों और पारंपरिक पैटर्नों से युक्त ऊनी कालीनों की हाथ से बुनाई की जाती है, मल्टीक्राफ्ट अनुभाग,
    हथकरघा प्रशिक्षण अनुभाग जहां पारंपरिक स्थानीय वस्त्रों की बुनाई के लिए आधुनिक व पारंपरिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाता है, काष्ठ नक्काशी अनुभाग तथा थांका पेंटिंग अनुभाग जहां प्रशिक्षार्थी प्राकृतिक रंगों के माध्यम से बौद्ध दर्शन और आध्यात्मिक कला को सजीव रूप प्रदान करते हैं और मुखौटा निर्माण अनुभाग में रंग-बिरंगे और भव्य लकड़ी के मुखौटे तैयार किए जाते हैं ,का अवलोकन किया।

    भ्रमण के दौरान माननीय राज्यपाल ने प्रशिक्षुओं और प्रशिक्षकों से संवाद किया। उन्होंने कारीगरों से उनकी प्रेरणा के बारे में पूछा और शिल्प के प्रति उनकी गहन रुचि को सराहा। इस दौरान उन्होंने कारीगरों का उत्साहवर्धन भी किया। साथ ही तैयार उत्पादों को बाजार की मांग के अनुरूप ढालने के लिए डिज़ाइनों के बारे में भी पूछताछ की।
    इसके अलावा प्रशिक्षण पूरा होने के बाद स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के साधन उपलब्धता पर भी जानकारी ली।

    इस अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए माननीय राज्यपाल ने कारीगरों के समर्पण और अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रकार के हस्तशिल्प कार्य न केवल सिक्किम की अनूठी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखते हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार प्रदान करने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

    राज्यपाल महोदय ने अधिकारियों से कहा कि सिक्किम के इन उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ले जाया जाना चाहिए, ताकि देश-विदेश के बाजारों में सिक्किम की कला को सही स्थान मिल सके।